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पुरुष कल्याण मंत्रालय और पुरुष आयोग बनाएं

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Published:  31/05/15 3:57 PM by Ajay Verma -  Last updated on 31/05/15 3:57 PM Ajay Verma
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पुरुष कल्याण मंत्रालय और पुरुष आयोग बनाएं

देश में मर रहा हर पुरुष महिला उथ्थान, शशक्तिकरण और सुरक्षा के नाम पे बलि चढ़ा दिया जाता आ रहा है!

 

  1. हर वर्ष 90000 पुरुष (बच्चे, युवा, शादीशुदा, प्रौढ़ और वृद्ध पुरुष) अात्महत्या कर रहे हैं!

 

  1. लाखों पुरुष (बच्चे, युवा, शादीशुदा, प्रौढ़ और वृद्ध पुरुष) सड़क दुर्घटनाओं में प्रतिवर्ष मरते हैं!

 

  1. औधोगिक विकास करते समय सुरक्षा के पैमानों को ध्यान में नहीं रखने से लाखों पुरुषों की अौद्योगिकीकरन और विकास के नाम पर दुर्घटनाओं में लाखों पुरुषो की मौत और अंग भंग की स्थिति प्रतिवर्ष होती आ रही है!

 

  1. सड़क पे चाकूओं, तलवारों, जहर, केमिकल, आगजनी, बलवा और बन्दूक की गोलियों की बौछार से हज़ारों पुरुषों को मार दिया जाता है!

 

  1. हज़ारों युवकों को समय पर उचित चिकित्सा सरकारी अस्पतालों में नहीं मिल पाती है, जिस कारण उनकी मौत हो जाती है! पुरुषों को मुफ्त चिकित्सा मिले !

 

  1. करोड़ों पुरुष बेरोजगारी की वजह से भीख मांगने को मजबूर हैं! लाखों पुरुष उचित शिक्षा के अभाव में कानून को अपने हाथ में लेकर अपराधी की तरह अपना जीवन व्यतीत करते हैं, जिन्हे सही नौकरी और आर्थिक सहायता प्रदान करने की आवश्यकता है, ताकि वे अपराध की और अग्रसर न हो सकें और सामान्य व्यक्तियों की तरह जीवन यापन कर सकें!

 

  1. करोड़ों पुरुषों को झूठे दहेज़ के केसों, रेप - बलात्कार के केसों में, छेड़छाड़ के केसों में, तेजाबी हमले के केसों में महिलाओं द्वारा फंसाया जाता है, जिसकी वजह से पुरुषों का अार्थिक, शारीरिक, मानसिक, सामजिक, कानूनी और भौतिक शोषण होता है, जिसकी वजह से जेल और न्यायालय में केसों की भरमार हैं इन सभी कानूनों में बदलाव लाया जाए!

 

  1. सभी कानूनों को बिना किसी लिंगभेद के बनाया जाए और कानून सभी पुरुष और महिलाओं के लिए समान होना चाहिए!

 

  1. इसकी कानूनी संरचना में शीघ्रता से सुधार किया जाना चाहिए! और झूठे केस डालने वाले लोगों पर सख्त कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए, और जितनी सज़ा कानून में अपराधी को मिलती है, उतनी सजा झूठे केसों में आरोप लगाने वाले व्यकि और समूह को दी जाए, ऐसा समान दंड का प्रावधान कानून में होना चाहिए!

 

  1. पुरुषों के लिए कोई ऐसा विभाग नहीं जो की पुरुषों की सुन सके इसलिए हर सरकारी और गैर सरकारी विभाग, कानूनों में, न्यायालयों में, पुलिस थानों में और मंत्रालयों में पुरुषों के लिए एक अलग से हेल्पडेस्क का गठन किया जाए, ताकि पुरुष अपनी बात बेझिझक उनको बता सकें और उचित सलाह और सहायता प्राप्त कर सकें!

Mra Sunil Pawar likes this.
 

Comments (1)

  
asharma
Delhi BJP said:
Thanks for sharing with us. Would suggest you to share your suggestions on https://mygov.in/ to make them reach right authority.
15/06/15 3:34 PM
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