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Press Release 1 : 07.08.2017-Delhi State | Bharatiya Janata Party

Press Release 1 : 07.08.2017-Delhi State

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Published: 07/08/17 11:39 AM by Delhi BJP
भाजपा मांग करती है कि केजरीवाल सरकार डी.टी.सी. पर एक श्वेत पत्र जारी कर दिल्ली की जनता को बताये कि डी.टी.सी. की सेवायें एवं आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए गत 30 माह में केजरीवाल सरकार ने क्या कदम उठाये हैं
यदि केजरीवाल सरकार अगले दो वर्ष में 2000 बसें भी खरीदती है तो भी जनवरी, 2020 में जब दिल्ली में विधानसभा चुनाव होना है उस वक्त सड़कों पर डी.टी.सी. कर 3000 बसें ही होंगी क्योंकि तब तक 10 वर्ष पुराना दो हिताई बेड़ा सड़कों से हट जायेगा-मनोज तिवारी
 
नई दिल्ली, 07 अगस्त।  दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी ने कहा है कि पूर्ववर्ती श्रीमती शीला दीक्षित सरकार की तरह वर्तमान अरविन्द केजरीवाल सरकार की गलत नीतियों के चलते दिल्ली परिवहन निगम (डी.टी.सी.) आज ठप्प होने की कगार पर पहुंच गया है।  डी.टी.सी. की आर्थिक स्थिति पूरी तरह डगमगा चुकी है और समय की मांग है कि दिल्ली सरकार डी.टी.सी. के मामलों पर एक श्वेत पत्र लाये।
श्री तिवारी ने कहा है कि आगामी दो वर्षों में डी.टी.सी. को विश्व स्तरीय बनाने का केजरीवाल सरकार का दावा पूरी तरह भ्रामक है।  डी.टी.सी. की आर्थिक स्थिति एवं अन्य मामले इस हद तक खराब हो चुके हैं कि जिन कदमों को उठाने की बात करके केजरीवाल सरकार सुधार लाना चाहती है उनसे अब कुछ संभव नहीं।
श्री तिवारी ने कहा है कि डी.टी.सी. ही नहीं पूरी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर कांग्रेस एवं आम आदमी पार्टी की सरकारों की नीतियां आज की कुव्यवस्था के लिए जिम्मेदार हैं।
लगभग वर्ष 2010 तक तत्कालीन दिल्ली सरकार ने बस माफिया से सांठगांठ के चलते ब्लू लाइन के नाम से चलने वाली किलर लाइन बसों को दिल्ली की सड़कों पर आतंक मचाने दिया।  दिल्ली उच्च न्यायालय के दबाव एवं राष्ट्रमंडल खेलों को देखते हुये तत्कालीन श्रीमती शीला दीक्षित सरकार ने डीजल एवं ब्लू लाइन बसों को बंद करने का निर्णय लिया और जे.एन.यू.आर.एम. फंड के माध्यम से 2008 से 2011 के मध्य 4000 लो-फ्लोर सी.एन.जी. बसें खरीदीं।  इनकी खरीद एवं रख रखाव में भी भारी धांधली के आरोप समय-समय पर लगते रहे हैं।
आज दिल्ली की सड़कों पर लगभग 11,000 बसों की आवश्यकता है पर न तो तत्कालीन श्रीमती शीला सरकार ने और न ही वर्तमान में केजरीवाल सरकार ने विगत 6 वर्षों में डी.टी.सी. के लिए नई बसों की खरीद पर ध्यान दिया है, केवल समय-समय पर खोखली घोषणायें की गई हैं।  ऐसा माना जाता है कि कांग्रेस एवं आप दोनों सरकारों ने निजी बस धारकों से सांठगांठ कर कलस्टर बसों को चलने की छूट दी है जो पूर्ववर्ती किलर लाइन बसों की तरह ही नियमों की अवहेलना कर पैसे कमा रही हैं।  
आज डी.टी.सी. के पास 3,940 का बेड़ा है जिसमें से अधिका अधिक 3,400 बसें सड़कों पर उतरती हैं और केजरीवाल सरकार दो वर्ष में 1000 साधारण बसें लाकर डी.टी.सी. के बेड़े को उच्च स्तरीय बनाने के हास्यास्पद दावे कर रही है।
श्री तिवारी ने कहा है कि केजरीवाल सरकार के इस दावे से बड़ा कोई झूठ नहीं हो सकता क्योंकि यदि सरकार आज बस का आॅर्डर दे तो पहली बस सड़क पर जनवरी, 2018 में आयेगी और तब तक वर्तमान बसों के बेड़े में से 500 बसों को अपना 10 वर्ष का जीवन पूरा कर लेने के कारण डी.टी.सी. को सड़कों से हटाना होगा।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा है कि यदि केजरीवाल सरकार अगले दो वर्ष में 2000 बसें भी खरीदती है तो भी जनवरी, 2020 में जब दिल्ली में विधानसभा चुनाव होना है उस वक्त सड़कों पर डी.टी.सी. कर 3000 बसें ही होंगी क्योंकि तब तक 10 वर्ष पुराना दो हिताई बेड़ा सड़कों से हट जायेगा। 
श्री तिवारी ने कहा है कि केजरीवाल सरकार अपनी पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की तरह ही डी.टी.सी. के परिचालन घाटे को कम करने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही, यहां तक कि घाटे वाले रूटों पर भी बसें कम करने पर ध्यान नहीं दिया गया।  बार-बार कहने के बाद भी सरकार ने मेट्रो के रूटों के साथ बस के रूटों का समन्वय बैठाने का भी कोई प्रयास नहीं किया है।
पिछले दशक में प्रत्येक नये परिवहन मंत्री ने मीडिया से अपनी पहली चर्चा में ई-टिकट लाने के साथ-साथ डी.टी.सी. की सम्पत्तियों, बसों, बस स्टाॅपों आदि के माध्यम से राजस्व अर्जित करने के दावे किये पर जमीन पर कोई कदम नहीं उठाया। 
डी.टी.सी. के राजस्व का बड़ा भाग ब्याज की अदायगी में जाता है पर केजरीवाल सरकार ने अपनी पूर्ववर्ती सरकार की तरह ही ऋण माफी या ब्याज माफी पर ध्यान नहीं दिया है।
डी.टी.सी. के 43 में से 30 बस टर्मिनल आज शहरी आबादी के बीच हैं पर दिल्ली सरकार ने किसी व्यवसायिक या समाजिक संस्था से अनुबंध कर इन टर्मिनलों से राजस्व उघाने पर कोई ध्यान नहीं दिया है।  दिल्ली मेट्रो अपने प्लेट फार्म और रेल में विज्ञापनों से भारी पैसा कमा रही है पर डी.टी.सी. ने ऐसा कोई प्रयास नहीं किया है।
7वें वेतन आयोग की सिफारिश लागू होते ही 33 हजार कर्मियों वाली डी.टी.सी. कंगाली के कगार पर पहुंच जायेगी पर कोई नहीं जानता कि केजरीवाल सरकार इस पर क्या सोच रही है।  
यह विडम्बना का विषय है कि 574 रूटों पर 36,000 भ्रमण फेरों का एकाधिकार रखने वाली डी.टी.सी. आखिर घाटे में क्यों चल रही है।
श्री तिवारी ने कहा है कि भाजपा मांग करती है कि केजरीवाल सरकार डी.टी.सी. पर एक श्वेत पत्र जारी कर दिल्ली की जनता को बताये कि डी.टी.सी. की सेवायें एवं आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए गत 30 माह में केजरीवाल सरकार ने क्या कदम उठाये हैं।
 

(महेश वर्मा)

प्रमुख, मीडिया विभाग                                
9013336116

(प्रवीण शंकर कपूर)

सह-प्रमुख, मीडिया विभाग

9811040330                   

Even if Kejriwal Govt buys 1000 buses every year yet with over 2000 D.T.C. buses likely to phased out in next 2 years by January 2020 hardly 3000 buses will be on roads-Delhi BJP

 

Kejriwal Government should bring out a White Paper on D.T.C. to tell the people of Delhi what it has done in last 30 months to better the services & financial health of D.T.C.-Manoj Tiwari

 

New Delhi, 7th August.   Delhi BJP President Shri Manoj Tiwari has said that wrong policies of erstwhile Smt. Sheila Dikshit's Congress Government & the present Arvind Kejriwal's Government have led to almost total collapse of Delhi Transport Corporation. The finances of D.T.C. are in a disarray and it is time that Delhi Government brings a White Paper on its affairs.

 

Shri Tiwari has said that it is sad that the Arvind Kejriwal Government is again trying to mislead the people of Delhi by claiming to make D.T.C. a world class body. The financial & other issues of D.T.C. are in a state where no improvement is possible with ordinary steps as being thought by Arvind Kejriwal regime.

 

Shri Tiwari has said not only D.T.C. but entire public road transport policy followed by the erstwhile Congress and present Aam Aadmi Party Governments is such that has put Delhi into a chaos.

 

Till around 2010 Delhi Government flirted with bus mafias allowing private bus operators widely infamous as Killer Lines to rule the roads. It was Delhi High Court pressure & the fast approaching Commonwealth Games deadline which forced the Smt. Sheila Dixit Government to ban diesel buses and using J.N.U.R.M. funds & other loans a fleet of over 4000 Low Floor CNG Buses was raised between 2008 to 2011. Even in this scams were reported both in purchase & maintenance contracts. 

 

Meanwhile even as need for on road buses has risen to 11000 during last 6 years neither Smt. Dikshit's nor Kejriwal's Government have made any effort to raise the fleet of D.T.C. Buses except for making hollow announcements of buying more buses. It is believed both the erstwhile Congress & the present AAP Government have connived with private bus cartels to allow Cluster Buses which again like earlier Killer Line buses are violating road safety norms and minting money.

 

Today D.T.C. has a total fleet of around 3940 buses out which only some 3400 buses operate every day the Kejriwal Government is trying to fool the citizens by saying that it would upgrade D.T.C. within 2 years by buying 1000 new standard buses.

 

Shri Tiwari has said that nothing can be a bigger farce then this claim of Kejriwal Government as even if Government orders purchase of buses today the first bus will come in around January 2018 by when around 500 plus existing D.T.C. buses would have outlived their lawful life and get shelved. 

 

Delhi BJP President has said even if Kejriwal Government buys 2000 buses over next 2 years in January 2020 when Delhi goes in for assembly polls Delhi would be having hardly 3000 working buses on road as by then two third of existing fleet would get shelved.

 

Shri Tiwari has said that Kejriwal Government like its predecessor Congress Government has done nothing to decrease operational losses of D.T.C. by curbing operations on economically unviable routes. Despite high hue & cry no effort has been made by Government to re-schedule bus routes by tying up with Metro routes. 

 

For almost a decade now subsequent Transport Ministers in Delhi in their first media interactions have spoken of bringing e-ticketing & generating additional revenue through use of D.T.C. properties including buses, bus stops & terminals advertising potential even as on ground nothing has been done.

 

Almost entire revenue generated by D.T.C. goes into payments of interest on loans taken but Kejriwal Government like its predecessor is not inclined to bail out the body with loan waiver or atleast interest waiver.

 

Almost 30 D.T.C. bus terminals out of total of 43 are now within urban city limits but neither the State Government nor D.T.C. itself has tried to tie up with any commercial or charitable organization to make its prime properties revenue generator. Even as Delhi METRO earns heavily from in-house advertising within trains & on platforms D.T.C. has not even tried to exploit this potential of its buses.

 

With the mandatory implementation of 7th Pay Commission recommendations on staff salary soon the body with around 33000 employees is going to go bankrupt and no one knows what preparation has Kejriwal Government made for this.

 

It is really strange how a body with total monopoly of on-road public transport running some 36000 trips on 574 routes continues to remain in losses.

 

Shri Tiwari has said it is time Kejriwal Government brings out a White Paper on D.T.C. to tell the people of Delhi what it has done in last 30 months to better the services & financial health of D.T.C.

(MAHESH VERMA)                                                                 

Head of Media Department  

+919013336116                                                           

(PRAVEEN SHANKAR KAPOOR)  

Co-Head of Media Department   

+919811040330

 

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