Loading ...

Press Release:12.03.2017-Delhi State | Bharatiya Janata Party

Press Release:12.03.2017-Delhi State

  • 4.6 
     /5
    Avg: 4.6 / 5 (1votes)
  • (1)
  • (291)
Published: 12/03/17 12:01 PM by Delhi BJP
दिल्ली भाजपा ने मनाया पत्रकारों के संग होली मिलन
श्याम जाजू ने हास्य चुटकुले के साथ तो मनोज तिवारी ने अपने संदेश में राष्ट्रविरोधी ताकतों की हार पर जताई प्रसन्नता 
नई दिल्ली, 12 मार्च।  दिल्ली भाजपा के मीडिया विभाग ने आज पत्रकारों के लिए होली मंगल मिलन का आयोजन किया। बड़ी संख्या में पत्रकारों एवं प्रदेश भाजपा पदाधिकारियों ने गुलाल एवं चंदन के साथ परम्परागत हर्षोल्लास के साथ होली मनाई।  भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री श्याम जाजू ने अपने सम्बोधन में उपस्थित पत्रकारों को होली की बधाई देते हुये कहा कि आज होली है, हास्य विनोद का पर्व है और न कोई बुरा माने, न बुरा समझे। यह कहते हुये उन्होंने आज कल सोशल मीडिया में चल रहे एक चुटकुले “जो अपने बाप की न माने वह अखिलेश, जो मां की न माने वह राहुल, जो सब की सुने और विवेक से काम करे वो मोदी और जो न किसी की सुने और न कोई जिसकी सुने वह केजरीवाल“ को सुनाया तो परिसर में उपस्थित कोई भी पत्रकार या पार्टी कार्यकर्ता अपनी हसी रोक नहीं सका।  
भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रो. विजय कुमार मलहोत्रा एवं प्रदेश महामंत्री संगठन श्री सिद्धार्थन ने सभी पत्रकारों एवं पार्टी कार्यकर्ताओं को होली की बधाई दी।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी ने अपने संदेश में दिल्लीवासियों को होली की शुभकामनायें देते हुये कहा है कि रंगों का त्यौहार होली इस वर्ष और भी रंगीन हो गया है क्योंकि देवतपो भूमि उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड ही नहीं मणिपुर व गोवा के लोगों ने भाजपा को सर्वोत्तम मत देकर होली के आनंद में राष्ट्रवाद का रंग भरा है तो पंजाब के लोगों ने राष्ट्रविरोधी ताकतों के मुखर प्रवक्ता अरविन्द केजरीवाल को नकार कर होली के आनंद को परम आनंद में बदल दिया है। 
पार्टी पदाधिकारियों कुलजीत सिंह चहल, राजीव बब्बर, रविन्द्र गुप्ता, राजेश भाटिया, श्रीमती शिखा राय, प्रवीण शंकर कपूर, हरीश खुराना, नवीन कुमार और अश्वनी उपाध्याय ने सभी का मंच से हास्य विनोद रख स्वागत किया।  अनेक पत्रकारों ने भी कवितायें, गीत एवं चुटकुले सुनाये। 
प्रदेश पदाधिकारियों जय प्रकाश, अभय वर्मा, श्रीमती कमलजीत सहरावत, कुलवंत सिंह बाठ, अमन सिन्हा, अशोक गोयल, नूपुर शर्मा गिरीश सचदेवा, श्रीमती शोभा उपाध्याय, श्रीमती प्रीति अग्रवाल, गजेन्द्र यादव, विक्रम बिधूड़ी, सतेन्द्र चैधरी, पवन मोंगा, सुनील यादव, श्रीमती पूनम पराशर झा, मोहन लाल गिहारा, विपिन बिहारी सिंह, मुकेश मान, गौरव खारी, आतिफ रशीद ने होली के रंग गुलाल लगा सभी पदाधिकारियों एवं पार्टी नेताओं का अभिनन्दन किया।   
 
 
(प्रवीण शंकर कपूर)
मीडिया प्रमुख
09811040330 
MOHSIN KHAN and David Sharma like this.
 

Comments (1)

  
subhash.kataria

*होली और नूतन वर्ष*

भारतीय संस्कृति में होली जैसे त्यौहारों का बहुत बड़ा महत्व है । वैसे भारतीय जीवन पद्धति में पर्व , त्यौहार, और उत्सव इत्यादि यह सब ब्यक्तिगत एवं सामुहिक प्रसन्नता व्यक्त करने के अलग अलग अवसर के रूप में माने जाते हैं ।

हमारे देश में पर्व मनाने के पार्श्व में खगोलीय कारण दृष्टिगत होता है जैसे चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण, पूर्णिमा, अमावस्या, शिवरात्रि, गुरुपूर्णीमा इत्यादि । इसी प्रकार त्यौहारों के पार्श्र्व में पौराणिक कथाओं में वर्णित घटनाएं ही आधार मानी जाती हैं जैसे होली, दीवाली इत्यादि और इसीप्रकार उत्सव इत्यादि व्यक्तिगत उपलब्धियों के कारण प्रसन्नता व्यक्त करने का एक माध्यम माना जाता है जैसे तिलकोत्सव विवाहोत्सव, वर्षगांठ, जन्मोत्सव इत्यादि । इस प्रकार हम देखते हैं की होली के त्यौहार के पार्श्र्व में पौराणिक कथा ही आधार के रूप में दिखाई देता है ।

मूल रूप से देखा जाए तो नूतन वर्ष की अभिव्यक्ति का एक रूप होली का त्योहार भी माना जाता है । जब नूतन वर्ष बसंत ऋतु के रूप में प्रथम दृष्टिगत होता है तो उस समय इसे नूतन वर्ष का प्राकृतिक परिवर्तन की दृष्टि से देखा जाता है यानी प्रकृति हर प्रकार से अपने को नए रुप में सजासवाँर करके दृष्टिगत होती है । पतझड़ के उपरांत नई पंखुड़ियों का निकलना और उसके उपरांत फलों से लद जाना, नई फसलों का कटना और धन-धान्य से घर को भर जाना ।

होली का त्यौहार नूतन वर्ष का द्वितीय चरण के रूप में दृष्टिगत होता है । होली के दिन प्रत्येक व्यक्ति एक नई सोच के साथ मित्र और शत्रु दोनों हाथों में गुलाल लेकर, अपने पुराने बैरभाव को भूल कर नए ढंग से अपनी एक सामाजिक सद्भावनायुक्त भूमिका के साथ एक दूसरे से गले मिलते हुए प्रारंभ करते हैं और यह क्रम पन्द्रह दिन तक चलता है । कई कई जगह तो पन्द्रह दिन की होली भी खेली जाती है ।

फिर इसके बाद ठीक पन्द्रह दिन पर चैत माह के कृष्णपक्ष का वर्ष प्रतिपदा का दिन आता है । वर्ष प्रतिपदा को नूतन वर्ष के प्रथम दिन के रूप में माना जाता है

वर्षप्रदिप्रदा नूतनवर्षारम्भ का तीसरा आयाम आध्यात्मिक परिवर्तन के रूप में परिलक्षित होता है । जिसमें नौ दिन तक लगातार पूजा पाठ करके नए वर्ष को बड़ी श्रध्दा के साथ प्रारंभ किया जाता है । यानी हिंदू जीवनपद्यति का नया वर्ष तीन आयामों में प्रारंभ होता है । पहला आयाम प्राकृतिक परिवर्तन, दूसरा आयाम सांस्कृतिक परिवर्तन, और तीसरा आयाम आध्यात्मिक परिवर्तन के रूप में हम स्पष्ट देख सकते हैं और आभास भी कर सकते हैं ।

इसलिए हम कह सकते हैं कि होली का त्यौहार नए वर्ष परिवर्तन का दूसरा चरण है और इसके बाद ठीक पन्द्रह दिन बाद नया वर्ष प्रारंभ होगा। होली की शुभकामना के साथ नूतन सव्त्सर की अग्रीम शुभ कामनाए...!

सुभाष कटारिया
सिपाही भारतीय जनता पार्टी

14/03/17 10:21 AM
 · 
 
 /5
Avg: 0 / 5 (0votes)
by

Top News