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Press Release:11.01.2017-Delhi State | Bharatiya Janata Party

Press Release:11.01.2017-Delhi State

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Published: 11/01/17 12:09 PM by Delhi BJP
मनोज तिवारी ने अरविंद केजरीवाल को दी निगम फंड एवं दिल्ली के ठप्प विकास के मुद्दे पर चर्चा की चुनौती
केजरीवाल सरकार के राजनैतिक विद्वेष के कारण चैथे वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू न किये जाने से तीनों नगर निगम आर्थिक रूप से पंगु हो गये हैं और उनके लिये अच्छी मूलभूत सुविधायें, प्राथमिक स्वास्थ्य और शिक्षा सेवा तथा छोटी समाज कल्याण पेंशन स्कीमें लागू करना भी असंभव हो गया है - मनोज तिवारी


नई दिल्ली, 11 जनवरी।  दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी ने आज नगर निगमों को अपेक्षित धन के मुद्दे और दिल्ली में पिछले 2 वर्षों के दौरान विकास कार्यों की उपेक्षा किये जाने पर एक सार्वजनिक चर्चा के लिये दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चुनौती दी है।

श्री तिवारी ने कहा है कि दिल्ली सरकार के अभिलेखों के अनुसार पिछले 2 वर्षों में विकास कार्यों पर व्यय में कमी आई है और केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के नगर निगमों के साथ राजस्व के बंटवारे पर चैथे दिल्ली वित्त आयोग की सिफारिशों को जानबूझकर रोक रखा है। 

केजरीवाल सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के डर से चैथे वित्त आयोग की सिफारिशों को दिल्ली विधानसभा में प्रस्तुत किया और उसे स्वीकार भी किया किन्तु उसे कार्यान्वित नहीं किया जिससे कि नगर निगमों को अपेक्षित सेवायें देने का अवसर नहीं मिले और निगमों में भाजपा नेतृत्व को बदनाम किया जा सके। 

श्री तिवारी ने कहा कि दिल्ली सरकार यह दावा करती है कि उसने नगर निगमों को अधिक धन का आवंटन किया है किन्तु सच्चाई यह है कि उन्हें आवंटित धन चैथे वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार उन्हें मिल सकने वाले धन का 50 प्रतिशत भी नहीं है। 

इतना ही नहीं, दिल्ली के नगर निगमों को उसी अनुपात में धन दिया जा रहा है जितना उन्हें 2011 में दिया जा रहा था जबकि केवल वेतन के ही बिल में 6वें एवं 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने से 150 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 

वर्ष 2012 में शीला दीक्षित सरकार द्वारा आधे-अधूर ढंग से नगर निगमों को तीन भागों में बांटने के समय दिल्ली सरकार से यह अपेक्षित था कि वह तीनों नगर निगमों को अपेक्षित धन उपलब्ध कराये किन्तु पहले शीला दीक्षित और अब अरविंद केजरीवाल ने राजनीतिक विद्वेष से काम करते हुये उन्हें उचित धन उपलब्ध कराने में या तो देरी की है या इनकार किया है जिससे जनसाधारण को कठिनाईयों का सामना करना पड़ा है। 

पूर्वी दिल्ली नगर निगम का वेतन बिल ही 1600 करोड़ रूपये का है जबकि उसका कुल राजस्व 400 करोड़ है। दिल्ली सरकार ने 609 करोड़ रूपये का फंड तो दिया है किन्तु म्युनिसिपल रिफार्म फण्ड देने से इंकार कर दिया है। 

इसी प्रकार उत्तरी दिल्ली नगर निगम का राजस्व 1500 करोड़ रूपये का है और उसे दिल्ली सरकार से केवल 1000 करोड़ रूपये आवंटित किये गये हैं जबकि उसका वेतन बिल ही 2600 करोड रूपये का है।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि केजरीवाल सरकार के राजनैतिक विद्वेष के कारण चैथे वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू न किये जाने से तीनों नगर निगम आर्थिक रूप से पंगु हो गये हैं और उनके लिये अच्छी मूलभूत सुविधायें, प्राथमिक स्वास्थ्य और शिक्षा सेवा तथा छोटी समाज कल्याण पेंशन स्कीमें लागू करना भी असंभव हो गया है। 

दो वर्ष पूरे हो जाने के बाद भी केजरीवाल सरकार के पास विकास के क्षेत्र में दिखाने को कुछ भी नहीं है। मुफ्त पानी, मौहल्ला क्लीनिक आदि फ्लाॅप साबित हुये हैं। 

नरेला से छतरपुर हो या द्वारका से गाज़ीपुर, ग्रामीण क्षेत्र, शहरी गांव क्षेत्र, झुग्गी बस्तियों, पुनर्वास बस्तियों, पुरानी दिल्ली या अनधिकृत कालोनियां, पूरी दिल्ली विकास कार्य के न होने से ठप्प हो गई है। कोई भी नये फ्लाई ओवर, सड़क, अस्पताल या विद्यालय नहीं बनाये गये हैं।   

 
(प्रवीण शंकर कपूर)
मीडिया प्रमुख
9811040330 


Manoj Tiwari Challenges Arvind Kejriwal for a Debate on Municipal Funds & Neglect of Development in Delhi

NON IMPLEMENTATION OF 4TH D.F.C. DUE TO POLITICAL BIASNESS BY KEJRIWAL GOVERNMENT HAS CRIPPLED THE 3 MUNICIPAL BODIES MAKING IT IMPOSSIBLE TO PROVIDE GOOD CLASS CIVIC AMENITIES, PRIMARY HEALTH & EDUCATION SERVICES AND TO IMPLEMENT ITS SMALL SOCIAL WELFARE PENSION SCHEME MANOJ TIWARI

 

New Delhi, 11th January.  Delhi BJP President Shri Manoj Tiwari has today challenged the Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal for a public debate on Municipal Funds issue & neglect of development in Delhi during last 2 years.

Shri Tiwari has said Delhi Government records itself tell that expenditure on development has gone down during last 2 years and Kejriwal Government is intentionally withholding implementation of 4th Delhi Finance Commission recommendation on revenue share of Municipal Corporations. 

 

Kejriwal Government presented & accepted the 4th D.F.C. recommendations in Delhi Assembly after Delhi High Court's intervention fear but has not implemented them so as to deny working opportunities to the civic bodies and thereby defame the BJP leadership there.

 

Shri Tiwari has said that Delhi Government claims to have given more funds to the Municipal Corporations but the truth is that the funds given are not even half of what they are entitled to as per 4th D.F.C. recommendations.

 

Moreover the Civic Bodies continue to receive the same funds in same proportion as they did in 2011 even as their salary bills alone have gone up by almost 150% due to the implementation of 6th & 7th Pay Commissions. 

 

At the time of trifurcation done haphazardly by the Sheila Dixit regime in 2012 the Delhi Government was supposed to meet all funding needs of the 3 Municipal Corporations but first Sheila Dixit and now Arvind Kejriwal has acted with political biasness to delay & deny rightful funds ultimately putting common citizen to pain. 

 

East D.M.C's salary bill is around 1600 crores while its total revenue is 400 crores, Delhi Government has funded around 609 crores meanwhile denying even Municipal Reforms Funds.

 

Similarly North D.M.C. has a revenue of 1500 crores and got around 1000 crores as its under allocated share of funds from the Delhi Government while its salary bill alone is Rs. 2600 crores.

 

Delhi BJP President has said that non implementation of 4th D.F.C. due to political biasness by Kejriwal Government has crippled the 3 municipal bodies making it impossible to provide good class civic amenities, primary health & education services and to implement its small social welfare pension scheme.

 

With 2 years of its regime completed Kejriwal Government has nothing to show on the development front. The gimmicks like Free Water, Mohalla Clinics have flopped. 

 

From Narela to Chhatarpur & Dwarka to Ghazipur be it the rural belt, urban villages, jhuggi clusters, resettlement colonies, walled city, unauthorized colonies, Delhi is besieged with non development as no new flyover, road, hospital or school has been launched.

(Praveen Shankar Kapoor)

Media Incharge

+919811040330

 

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